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मौन धारण क्यों।Aakhir kyon

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क्यो करते हैं मौन धारण ...
कुछ लोग अष्टमी, एकादशी, पूर्णिमा या अमावस्या में से एकाध दिन ही मासिक मौन पालन करते हैं। उसी तरह कुछ लोग पाक्षिक तो कुछ लोग किसी निश्चित दिन सप्ताहांत में मौनाचरण करते हैं। यदि मौन पालन के दिन उपवास रखा जाए तो मौन अधिक परिणाम कारक होता है। कुछ साधक चातुर्मास अथवा एक बारह वर्षों का मौन रखते हैं। मौन साधना प्राचीन तपश्चर्या का छोटा रूप है। मौन धारण करने वाले साधक के शरीर में दैवी शक्ति उत्पन्न होती है। उसकी इच्छा शक्ति एवं मनोबल जैसे-जैसे बढता जाता है, वैसे-वैसे अल्प, लघु, क्षुद्र या महासिद्धि का लाभ प्राप्त होता है। सामान्य मौन से भी अनेक लाभ होते हैं। यदि व्यावहारिक समस्या खडी होने पर उपवास रखकर मौन पालन किया जाए तो मन के अंदर की आवाज सुनाई देती है तथा उचित दिशा में कदम बढते हैं। इसके द्वारा उचित निर्णय लिया जा सकता है।

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