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हे तू पांच ठगां ने ठगली-Kabir Ke Shabd

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
हे तू पांच ठगां ने ठगली,
तने भजन करा ना पगली।

बाबुल के घर खाई खेली,
आई जवानी हुई अलबेली।
तू ओढ़ पहर के सज ली।।

सास ससुर के मन को भाई,
सब कुनबे ने खूब सराही।
तज पीहर सासरे भग ली।।

नो बेटे दस कन्या जाइ ,
चूंट-2 के देह तेरी खाई।
तू मोह जाल में फंस ली।।

जल बुझ काया होगी ढेरी,
कुनबा बात मानता ना तेरी।
तने लोग कहें बे अकेली।।

गुरु अपने के जाने धोरे,
इब क्यों बैठी कालर कोरे।
तू बिन मूल भाव के बिकली।।

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