अध्ययन

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          सतत अध्ययन करते-२ मनुष्य जीवन में समाधी अवस्था को प्राप्त कर सकता है।
         स्वाध्याय के समान तप न अतीत में हुआ,न वर्तमान में है और न भविष्य में होगा।
          अध्ययन के प्रति प्रेम जीवन में आने वाले विषाद और क्लांति के क्षणों को आनंद और प्रशन्नता के क्षणों मे परिवर्तित करने की क्षमता प्रदान करता है।
          धूर्त्त लोग अध्ययन का तिरस्कार करते हैं, सामान्य जन उस की प्रशंसा करते हैं और ज्ञानी जन उस का उपयोग करते हैं।।                  बेकन।
          पढ़ना सब जानते हैं, पर क्या पढ़ना चाहिए
ये कोई नहीं जानता ।
         दूसरी चीजें बल से छीनी जा सकती है या धन से खरीदी जा सकती  हैं। किंतु  ज्ञान  केवल अध्ययन से
प्राप्त होता है। और अध्ययन एकांत में किया जाता है।
        सांगोपांग वेड पढ़ कर भी जो वेदों के द्वारा जानने
योग्य परमात्मा को नहीं जानता,वह मूढ़ केवल वेफों का बोझ धोने वाला है।
       अरे अज्ञानी मानव। अमर आत्मा का निषेध करने वाले ग्रन्थों का आधार ले कर तुम पथ भृष्ट हो गए हो।अब इस मोह निद्रा से जाग जाओ,अपने नेत्र खोलो।तुम ने तो अपने लिए नर्क मे स्थान निश्चित कर लिया है।र उस अंधतम प्रदेश में जाने के लिए सीधा पार पत्र प्राप्त कर लिया है।स्वर्ग द्वार बंद करने वाले निकृष्ट ग्रन्थों को पढ़ने से ऐसा हुआ है।इन्हें अग्नि की भेंट चढ़ा दो तथा गीता एवं उपनिषदों को पढो।नियमित जप कीर्तन तथा ध्यान करो और  इस  भांति  अपने बुरे  संस्कारों  को आमूल नष्ट कर डालो।तभी तुम विनाश से सुरक्षित रह सकोगे।।             
                                               शिवा नन्द सरस्वती।

        
                             

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