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परिवर्तन----इस संसार में

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Jagran

परिवर्तन प्रकृति का नियम है
Thu Aug 20 10:53:06 IST 2015

इस संसार में कुछ भी अपरिवर्तनशील नहीं है। सब कुछ नश्वर और क्षणभंगुर है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है। जो परिवर्तन को और अनित्यता को समझता है, वस्तुत: वही ज्ञानी है। जीव, जगत और ब्रrा को सही तरीके से परिभाषित करने की क्षमता भी ज्ञानी-ध्यानी, ऋषि-मुनियों में ही होती है। भगवान श्रीकृष्ण गीता में संदेश देते हैं कि इस अनित्य जगत में देह को पाकर मनुष्य को इसे समझते हुए विषय-वासनाओं के दलदल में नहीं फंसना चाहिए।

ज्ञानी ही है, जो ऋतुओं के अनुकूल यज्ञ को सफल कर लेता है। ज्ञानी ही है, जो बाधाओं में व्यवधानों में मार्ग ढूंढ़ निकालता है। मनुष्य को पीड़ा तभी होती है, जब उसके जीवन में परमात्मा नहीं होता है। प्रसन्नता और आनंद परमात्मा की उपस्थिति का आभास है। दुनिया के पीछे भागने से बढ़िया है कि हम दुनिया के मालिक परमेश्वर के पीछे भागें, उसकी शरण में स्वयं को उसके श्रीचरणों में समर्पित करें और यह भाव रखें कि यह सब कुछ जो हमें मिला है। वह उसकी कृपा के कारण संभव हो सका है। यदि जीवन में ज्ञान उतर आए, तो छह संपदाएं स्वत: प्राप्त हो जाती हैं। शम, दम, तितिक्षा, उपरति, श्रद्धा और समाधान। शम है- सब तरह की शांति। दम का तात्पर्य इंद्रिय संयम से है। तितिक्षा है- द्वंद्व सहन करना, उपरति है- विषयों के प्रति आसक्ति न होना।

श्रद्धा का मतलब है- सत्य से प्रगाढ़ प्रेम। जबकि समाधान है-समाधि, और सत्य का दर्शन। 1 प्रभु से जब भी याचना करें मांगे तो उसकी भक्ति मांगे। पवित्र बुद्धि और सुमति की प्रार्थना करें। वह परमपिता परमेश्वर अपनी कृपा हम पर अवश्य करता है। इस बात पर जीवन में जरूर विचार करें कि हम सत्य को ग्रहण कर रहे हैं या नहीं। असत्य को छोड़ रहे हैं या नहीं। यह भेद भी ज्ञानी ही समझ पाता है। धर्मानुसार अर्थ और काम हमारी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। जरा सोचिए, इस सुंदर संसार का निर्माण करने वाला परमात्मा भला कितना सुंदर होगा। संसार के सौंदर्य को परमात्मा की देन मानकर देखते हैं, तो बहुत सी चीजें समझ में आती हैं। परमेश्वर का यह संसार न तो मरता है और न जीर्ण-शीर्ण होता है। बस, परिवर्तन के साथ हमेशा इसमें नई कोपलें फूटती रहती हैं। सर्व कल्याण और सुख प्रदान करने वाला मात्र एक परमेश्वर है। आइए! हम भी अपने हृदय मंदिर को कुछ इस प्रकार सजाएं कि उसका वास सहज हो सके।

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