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ध्यान का आनंद। सुविचार – ध्यान -Aakhir kyon

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सुविचार – ध्यान

आनन्द का मार्ग ” ध्यान ” से होकर जाता है.
ध्यान इसलिए नहीं है कि आपको दुनिया से काटने, कोने में बैठाने की कोई विधि है. ज़िन्दगी में और सफल हो सकें, ज्यादा सुखी हो सकें, ज्यादा आनन्द से रह सकें, उस स्थिति का नाम ध्यान है.

अपने अन्तःकरण को कभी ध्यान की अनुभूति कराइए, उस समय देखना कि उसका स्वाद कैसा होता है, यह एक ऎसा नशा है कि इसको सच्चे ढंग से चखने के बाद आपको लगेगा कि इस नशे में डूबने का बहुत आनन्द है.
ध्यान से हम स्व में स्थित हो जाते हैं. हमारे मन में जो प्रश्नो का भण्डार होता है, हम बार- बार उलझनो में उलझे रहते हैं, उनका समाधान ध्यान से स्वयं होना शुरू हो जाता है.

जब जीवन में ध्यान के फूल खिलते हैं, एकान्त जब सुहावना लगने लगता है, तो जीवन सन्तोष और कृतार्थता से भर जाता है.
जो लोग ध्यान करके अपने आप को पका लेते हैं, फिर उनके अन्दर इतनी शक्ति आ जाती है कि, फिर संसार में कैसे भी आँधी, तूफान आते रहें, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता.
ध्यान के द्वारा आपकी सहन- शक्ति और मानसिक शक्ति इतनी बढ़ जाती है कि जिस पीड़ा से एक सामान्य व्यक्ति बुरी तरह व्याकुल हो जाता है, उसे आप प्रसन्नतापूर्वक सहन कर सकते हैं.
ध्यान करते- करते ऎसा एक गहरा स्वाद आ जाता है, जिसमे निश्चय हो जाता है कि हमारे भीतर एक अपार स्त्रोत है : सुख का.
ध्यान एक व्यायाम है, जिससे मन पर, विचारों पर नियन्त्रण करना सम्भव होता है.
जो ध्यान करते हैं, उन्हें भौतिक विपदा विचलित नहीं कर पाती है, इसलिए वे सदा ही प्रसन्न रहते हैं.
ध्यान करते रहने से एक ऎसी ताकत मिल जाती है कि, बड़े से बड़ा दुःख जब सामने आएगा तो वह बड़ा दुःख लगेगा ही नहीं — सहन करने की शक्ति बड़ी भारी आ जाती है.
ध्यान ऎसी स्थिति है, जहाँ आपको स्वयं से आनन्द मिलने लगता है. यह भी एक अनोखा नशा है, इसकी मस्ती ही अलग होती है.
ध्यान जीवन जीने की एक विधि सीखाता है. एक बेहतर माहौल, तनाव रहित आवोहवा, इसी रास्ते सम्भव है.
मनुष्य अपने होने का अर्थ जाने, अधिक से अधिक ऊँचाई पर जाए, स्वस्थ शरीर और मस्तिष्क को ध्यान वगैरह की विधियों से अनुशासित कर कोई भी सामन्य इन्सान बेहतर बन सकता है.
जीवन हर छण बदलता रहता है, बहुत कम लोग इस बदलाव को महसूस कर पाते हैं, लेकिन ध्यान के द्वारा हम इसको महसूस कर सकते हैं.
ध्यान एक अमृत बून्द है, जब वह हमारे अन्दर समा जाती है, यह अमृत बून्द के अन्दर पहुँचते ही ध्यान की प्रक्रिया आरम्भ हो जाती है, ध्यान में उतरने के बाद हमारे विचार बदल जाते हैं और जीने का ढंग बदल जाता है. जीने का ढंग बदलने से हमारे व्यक्तित्व में एक अलग ही तरह का निखार आता है.
जब हम ध्यान करते हैं तो, हमारे शरीर में रासायनिक परिवर्त्तन व्यवस्थित हो जाते हैं. इस अवस्था में जो न्याय संगत है, वही करने की इच्छा होती है, यह स्वतः होता है.
ध्यान एक अमृत्त बून्द है, जब वह हमारे अन्दर समां जाती है, उसी छण से हमारे अन्दर सम्पूर्ण परिवर्त्तन की प्रक्रिया आरम्भ हो जाती है, हमारे विचार बदल जाते हैं, जीने का ढंग बदल जाता है.
ध्यानस्थ मन में न तो क्रोध की गर्जना सुनाई पड़ती है, न दुःख का क्रन्दन.
ध्यान का मतलब है कि आप अपनी ज़िन्दगी को जिम्मेदारी से जीयें.
ध्यान की खुशबू से अपने उजड़े हुए जीवन को सौन्दर्य से भर दो.
ध्यान का अभ्यास अंदर एक शांत संपर्क बना देता है जो हमारे बहुत करीब है और हमेशा हमारी पहुंच के अंदर है.

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