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मत लुटे हंस रस्ते में उड़ै तनै कौन छुड़ावेगा-Kabir Ke Shabd-mat lute hans raste men udai tanai kaun chhudaavegaa।।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द

मत लुटे हंस रस्ते में उड़ै तनै कौन छुड़ावेगा।।
हंसों का एक देश है, जहां जाए न कोई।
काग बरण छूटे नहीं, कैसे हंसा होइ।।

हंस बसै सुख सागरे, झीलर न आवै।
मुक्ताहल को छोड़, कहीं चोंच न लावै।।

मानसरोवर की कथा, बुगलां कहां जानै।
उसके चित्त तलया बसै, कहो कैसे मानै।।

हंसा नाम धराय के, कागा संग भूले।
ज्ञान दृष्टि सूझे नहीं, वाही मत झूले।।

हंस उड़ हंस मिले, कागा रहे न्यारा।
कह कबीर उड़ ना सकै, जड़ जीव बिचारा।।

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