53 भरम की समझ

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भ्रम की समझ


भ्रम  की समझ
मानव जीवन की साथर्कता ही तभी है जब भ्रम के जाल से निकल सके |
भ्रम की स्थिति में अपने स्व पर विश्वास नहीं रहता इसी से कर्मो की दिशा बदलती रहती है जो हमें सफलता में बाधित करती है |
अपनी उन्नति अंतर्मन में ही जानने पर होती है |
कलयुग में अच्छे इन्सान बनना ही साधना है | साधू बन जाऊंगा  , दूसरों  का भला करूँगा , अपनी प्रगति करना भूल जाता है  , दूसरों को सुधारने का भ्रम हो जाता है |
दूसरों को  सुधारने का भूत ही हमारी उन्नति में सबसे बड़ी बाधा है | सबसे पहले हमें अपनी सुधार करने की आवश्यकता है | अगर हम सभी अपना - अपना सुधार स्वयं करें तो फिर दूसरों के सुधार करने का प्रश्न ही नहीं उठता |
हम चाहते नहीं है , भूल जाते है , भ्रम हो जाता है |
सपने के समय या अर्धनिद्रित अवस्था में सावधान होकर उस क्षण में अभ्यास करें की हम क्यों आये है ? यहाँ पर  - हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है ?
सोते समय या सपने के समय जो तरंग होती है उसमें हम आसानी से उस स्थति को समझ  सकते है इसे ही शास्त्र में तुरीयावस्था कहते है |
आन्तरिक जीवन में जो आगे बढ़ने लगता है  उसकी  परीक्षा होती है | कभी - कभी वो दुःख मानता है और वह वहीं खड़ा रह जाता है |  जो इसको अपने लिए अच्छा समझता है वह प्रगति करके आगे बढ़ता है |
ये हमारे अन्दर जो बैटरी डाली है - वो नियम है | इस नियम का पालन करने पर हमारा अभ्युदय होता है | मुख्य बात हमारी प्रगति की होती है |
भ्रम को दूर करने के उपाय  -
अभ्यास करें कि हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है ?
अपने उद्देश्य के बारे में सोचते रहना , विचार करते रहना ही साधना है क्योंकि विवेक पूर्ण विचार करने पर भ्रम का नाश होता है और अपने उद्देश्य की प्राप्ति अवश्य होती है |
मधुरीता झा

                        धन्यवाद।

                       संग्रहकर्ता उमेद सिंह सिंगल।



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