3 अपने मन को जानें और वश में करें।

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                             गौतम बुद्ध
       हम लोग अक्सर एक दूसरे से पूछते हैं कि हम अपने मन को अपने वश में कैसे करें। लोग अलग-२ तरीके बताते हैं और हम उन्हें करने की भी कोशिश करते हैं। और अंत में हम नाकाम हो जाते हैं।
      गौतम बुद्ध के जीवन की एक छोटी सी कहानी बताएगी कि इस तरह आप अपने मन का उपयोग अपने हिसाब से कर सकते हैं।अगर आप इस कहानी को समझ पाए तो इसी क्षण से आप के जीवन में बड़ा बदलाव आ सकता है।
      एक बार गौतम बुद्ध एक नगर से गुजर रहे होते हैं।उस नगर में एक कपड़ों की एक बहुत बड़ी दुकान होती है। उस पर एक व्यक्ति बैठा होता है। बुद्ध की नजर उस व्यक्ति पर पड़ती है।वह व्यक्ति बड़ा दुखी नजर आता है।
        बुद्ध उस के पास जाते हैं और उससे पूछते हैं।    भन्ते आप इतने दुखी क्यों हो। वह व्यक्ति बुद्ध को देख कर उन्हें प्रणाम करता है ओर  कहता है क्या बताऊँ? बुद्ध! जबसे मेरी पत्नी की मृत्यु हुई है तब से मैं अपने छोटे बेटे को अपने साथ अपनी दुकान पर ले आता हूँ।पर उसका व्यवहार बहुत खराब है। जब भी कोई ग्राहक  कुछ सामान लेने दुकान पर आता है।मेरा बेटा उसकी पगड़ी को उतार कर फैंक देता है या उस के थैले को उतार कर फैंक देता है। जिस से कि मेरे सभी ग्राहक अपमानित महसूस करते हैं। और अब वे लोग मेरी दुकान पर आते भी नहीं है। जिससे मुझे भारी नुकसान हो रहा है। घर पर कोई नहीं रहता जिस के कारण  मैं अपने बच्चे को घर पर छोड़ भी नहीं सकता। मैने अपने बेटे को बहुत समझाने की कोशिश की,डांटा, पीटा, सब कुछ करके देख लिया परन्तु कोई तरीका काम नहीं आया।
       बुद्ध कहते हैं तुम चाहो तो मैं तुम्हारी सहायता कर सकता हूँ।
      बुद्ध की बातें सुनकर उसकी आंखों में खुशी की चमक आ जाती है। वह व्यक्ति बुद्ध से कहता है। बुद्ध बड़ी कृपा होगी आपकी यदि आप मेरी इस समस्या का हल करदें तो।
       बुद्ध उस व्यक्ति से कहते हैं, परन्तु मैं जो भी करूँगा तुम उस में दखल नहीं दोगे और ना ही कोई प्रश्न करोगे। तुम्हें मुझे यह वचन देना होगा। वह व्यक्ति बुद्ध को वचन देता है कि आप जो भी करेंगे मैं उसमें बिल्कुल भी दखलन्दाजी नहीं करूंगा।
      अगले दिन बुद्ध उस दुकान पर पहुंचते है। बुद्ध अपने सिर पर एक पगड़ी बंधे हुए होते हैं। वह बच्चा हमेशा की तरह बुद्ध के पास आता है और उनकी पगडी उतार कर फेंक देता है। बुद्ध मुस्कुराते हैं और उस बच्चे से कहते हैं बहुत अच्छे बेटे और अब जाओ और उस पगड़ी को उठा कर लाओ। वह बुद्ध की बात सुनकर वह पगडी उठा कर लाता है और बुद्ध को देता है। बुद्ध वहां से चले जाते हैं।
      अगले दिन बुद्ध एक लकड़ी और कुल्हाड़ी लेकर आते हैं और दुकान पर आ कर बैठ जाते हैं। वह बच्चा बुद्ध की पगड़ी को उतारने के लिए जाने वाला ही होता है कि बुद्ध उसे कहते हैं। बेटा जाओ उस कुल्हाड़ी से उस लकड़ी को काट दो जरा। बुद्ध की बात सुन तुरंत उस लकड़ी को काटने के लिए जाने लगता है। उस बच्चे का पिता देख कर थोड़ा घबराता है। क्योंकि वह डरता है कि मेरे पुत्र को कहीं चोट न पहुंच जाए। परन्तु उसने बुद्ध को वचन दिया हुआ है। इसलिए वह चुप रहता है।
         वह बच्चा जाता है और लकडी काटने की कोशिश करता है। बहुत देर कोशिश करने के बाद वह थक जाता है। और वापस आ कर बैठ जाता है। इस तरह बुद्ध रोज आते और उसको अलग अलग तरह का काम बताते। और वह बच्चा उस काम को करता।
       ऐसा करते करते बुद्ध को सात दिन हो जाते हैं।अब वह बच्चा भूल ही जाता है कि उसे किसी की पगड़ी भी उतार कर फैंकनी है। बुद्ध सात दिन में उस बच्चे की आदत को बदल देते हैं। और उसके पिता बहुत खुश होते हैं। और बुद्ध को धन्यवाद कहते हैं।
       जिन लोगों ने भी यह कहानी सुनी बहुत सारे लोग तो बड़ी समस्या में फंस गए होंगे की इस से मन को कंट्रोल करने का क्या सम्बन्ध है। मैं आप से कहता हूँ, यदि आप अपने मन को खुद कोई काम नहीं बताओगे तो वह उस बच्चे की तरह अपना काम करेगा। आप हमेशा अपने मन से यह तो कहते हो कि ये मत कर, वो मत कर,यहां मत जा, वहां मत जा। पर आप उससे यह नहीं कहते कि ये कर, वो कर, इसे कर, यहां जा, वहां जा। यही आप की सबसे बड़ी गलती है। उस बच्चे की तरह हमारा मन भी हमारे वश में हो सकता है। यदि हम उसे काम बताएं ना कि उसे रोकने का प्रयास करें। मन का स्वभाव है काम करना, कुछ सोचना, कुछ करना। अब हमारे पास दो विकल्प हैं। या तो मन को उसके हिसाब से काम करने दें या फिर हम उससे अपने हिसाब से काम करवाएं। अगर आप अपने मन के द्वारा अपने हिसाब का काम करवाना सीख गए तो  आप पाएंगे कि आप का मन आप का इंतजार करेगा कि कब आप उसे आदेश दे। ज्यादातर मन अपने हिसाब से काम कर रहा है। और यही सबसे बड़ी समस्या है। आशा करता हूँ कि आप को इस छोटी कहानी सके एक बडी सीख मिलेगी और अब आप अपने मन को कुछ करने से रोकने की बजाय उसे कुछ करने के लिए देंगे। क्योंकि मन का स्वभाव ही कुछ करना है। अगर आप उसे कुछ करने के लिए नहीं देंगे तो वह अपने हिसाब से काम करेगा।
         (पानी का स्वभाव बहना है। अब ये आप के हाथ में है कि उसे दिशा दिखाएं या खुद बहने दें।
               धन्यवाद।
                           संग्रहकर्ता उमेद सिंह सिंगल

     
                      
    

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