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कबीर मेरे हिवरे में। 12

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          मेरे हिवरे में बस गए रामा,
हरि दर्शन की प्यास हमारे, कद पहुँचो उस गामां।
   प्रेम घटा जब चढ़ी रे गगन में, भीजन लागे मेरे दामा।
   चित्त चातक पी पी लौ लाई, रटत रहे हरि नामा।।
नाला नैन हिलोर हिय की बहत रहे निशि यामा।
रक्त मांस दोउ भेट विरह की, रहे अस्त और चामा।
    स्वामी गुमानी राम दर्श में, जाए कहि पैगामा।
    नित्यानन्द को हित कर राखो, चरण छत्र की छामा।।

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