loading...

कबीर सुख भी मुझे प्यारे हैं। 190ल

Share:

सुख भी मुझे प्यारे हैं, दुःख भी मुझे प्यारे हैं।
    छोड़ूँ मैं किसे भगवन, दोनों ही तुम्हारे हैं।।
सुख दुःख ही जीवन की, गाड़ी को चलाते हैं।
सुख दुःख ही तो हम सब को,इंसान बनाते हैं।
            सँसार की नदियां के दोनों  ही किनारे हैं।।
दुःख चाहे ना कोई, सब सुख को तरसते हैं।
दुःख में सब रोते हैं, सुख में सब हंसते हैं।
           सुख मिले जिसको, उसे दुःख भी तो प्यारे हैं।।
मैं कैसे कहूँ मुझ को, ये दे दो या वो दे दो।
जो भी तेरी मर्जी हो, मर्जी से तुम दे दो।
         मैने तो तेरे आगे ये हाथ पसारे हैं।।
सुख में तेरा शुक्र करूँ, दुःख में फरियाद करूँ।
जिस हाल में रखे मुझको, उस हाल में याद करूँ।
         यादों में तेरी मैनें, ये गीत सँवारे हैं।।

कोई टिप्पणी नहीं