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कबीर रे दीवाने बन्दे कौन है

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      रे दीवाने बन्दे कौन है तेरा साथी, रे मस्ताने।।
जैसे बूंद ओस का मोती, ऐसे काया जाती।
तन से मनवा न्यारा होजा, पड़ी रहेगी माटी।।
    खाले पिले लेले देदे, यही बात है आछी।
     चार पहर साहिब ने भजले, के बांधेगा गाँठी।।
मातपिता तेरा कुटुम्ब कबीला बेटे बेटी नाती।
अंत समय कोय काम न आवै, दिल से होले राजी।।
      चार जने तनै लेकै चाले, ऊपर चादर तानी।
       कह कबीर सुनो भई साधो, सद्गुरु बोलै वाणी।।

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