100 कबीर बाण हरि का लाग्या। 60

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बाण हरि हे लाग्या, बाण हरि।।
मीरा जी के लाग्या, बाण हरि।।
ज्ञान बाण हृदय में लाग्या,इस थारी मीरा कै।
            प्रेम कटारी इसके कालजे अड़ी।।
तन के कपडे तार भगाए, इसी ए हुई थारी मीरा।
            अंग में तो उसने भभूत मली।।
अन्न नहीं खावै या जल नहीं पीवै,इसी हुई हे थारी मीरा।
            सूख के वा हुई लकड़ी।।
मीरा के रविदास गुरू हुए,इसी बनी ए थारी मीरा।
              गुरू के चरण में जाए पड़ी।।

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