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कबीर। संग चले सोई धन है सन्तों। kabir ke shabd no 135

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संग चले सोई ध है सन्तों, छूट जाए सोई मन मा माया। करो तैयारी ऐसे धन की, आगे होय सहाया।
    जमा करो कुछ ऐसी पूंजी, जो नहीं होय पराया।
    नहीं छूटै कोय चोर न लूटै, ख़र्चत बढ़ै सवाया।।
जोड़त-२ उम्र गंवाई, हाथ कछु नहीं आया।
जिन पकड़े सोई छूट जाट है, फिर काहे भरमाया।।
    लाख करोड़ी जोड़ी जिनने, नाम नहीं उन पाया।
    बुद्ध कबीर फकीरी लेकर, जग में जस फैलाया।।
महावीर महादेव मुहम्मद, को दुनिया ने गाया।
रामदेव रैदास अनेकन, सन्तों ने फरमाया।।
    शाह सिकन्दर चक्करवर्ती, राजाओं ने नहीं पाया।
हम जोह रहे चंद रत्न धन, भीतर वो ही समाया।।

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