कबीर। पीहर में दाग लगा आई। 228

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पीहर में दाग लगा आई चुनड़ी।।नैहर में।।
     लगा आई चुनड़ी, गंवा आई चुनड़ी।
रँगरेजा को मर्म न जानै,
          नहीं मिले धोबी तो कौन करे उजड़ी।।
ज्ञान का साबुन, ला कै धोले,
           सत्त संगत जल भर लाओ गगरी।।
कह कबीर सुनो भई साधो,
          बिन सत्संग कौन विधि सुधरी।।

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