410 कबीर। बाजा अंत समय का बाजा। 260

Share:

बाजा अंत समय का बाजा, साझा सब तैं छूटेगा।।
   उस दिन देखूं तेरे हिमाती, दूर हटेंगें गोती नाती।
   यम के दूत पाड़ लें छाती, सिर ने धड़ धड़ कुटेगा।।
नहीं किसी की पेश चलेगी, गल तेरे में फांस घलेगी।
कोन्या घड़ी टलेगी, यम तनै चोडै लूटेगा।।
    जितने धोरै तेरे हकीकी, जिनको कहता है नजदीकी।
    होजा मित्र तांहि फीकी, सबतें नाता टुटेगा।।
मित्र प्यारे और सगाजी, एक दिन तोड़ें सभी लगाजी।
मंगलानन्द मत करे दगाजी, भर्म का सागर फूटेगा।।

No comments