कबीर। कसमें वादे प्यार वफ़ा

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कसमें वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या।
   कोई किसी का नहीं ये झूठे, वादे हैं वादों का क्या।।
होगा मसीहा सामने तेरे, फिर भी न तूँ बच पाएगा।
तेरा अपना खून ही आखिर, तुझको आग लगाएगा।
          आसमान में उड़ने वाले,
                         मिट्टी में मिल जाएगा।।
सुख में तेरे साथ चलेंगे, दुख में सब मुंह मोड़ेंगे।
दुनिया वाले तेरे बन कर, तेरा ही दिल तोड़ेंगे।
          देते हैं भगवान को धोखा,
                         इंसां को क्या छोड़ेंगे।।

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