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सिद्धान्तों को छोड़ो, जीवन को देखो। - Leave the principles, look at life.

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आचार्य प्रशान्त – उद्गार मौन के
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सिद्धांतों को छोड़ो, जीवन को देखो
श्रोता १: सर, प्रेम को परिभाषित करें?
वक्ता: मैं परिभाषित कर दूँगा पर वो मेरी परिभाषा होगी, मैं कर सकता हूँ, कर ही दूँगा तुम्हारे लिए। अच्छा मैं तुम्हें बोले देता हूँ क्या है प्रेम, उस से आ जाएगा तुम्हारे जीवन में प्रेम?
श्रोता १: जब याद करेंगे तो आ जाएगा।
वक्ता: याद करने से आएगा? मुझे अभी वाकई बड़ी प्यास लग रही है।ज़रा ज़ोर-ज़ोर से बोलो, H2O-H2O, और उसकी पूरी परिभाषा कर दो कि क्या एटॉमिक नम्बर होता है, कितने कोवैलैंट बौंड हैं, कितने एलेक्ट्रोवैलैंट बौंड हैं, सब कुछ बता दो, पूरा, सब कुछ बता दो H2O के बारे में, उस से मेरी प्यास बुझ जायेगी?
श्रोता २: नहीं सर।
वक्ता: कैसी बातें कर रहे हो? प्रेम के बारे में कुछ बोल दूँगा तो उससे तुम्हें प्रेम उपलब्ध हो जायेगा और प्रेम को तुम तब तक जान नहीं सकते जब तक तुम प्रेम…
सभी श्रोता: प्रेम करोगे नहीं।
वक्ता: करे नहीं, हुए नहीं। तुम्हें बोले देता हूँ पर तुमको कुछ मिलेगा नहीं। हाँ , बेचैन और हो जाओगे कि ये कैसी अद्भुत सी बात है। क्या बता दिया?
श्रोता ३: सर, हम जानते ही नहीं।
वक्ता: प्रेम तुम्हारे मन की एक स्थिति होती है जिसमें तुम पूर्ण होते हो और तुम्हें आवश्यकता ही नहीं होती किसी और की, प्रेम तुम्हारे अपने मन का आनन्द है जिसमें तुम किसी और की तरफ इसलिए नहीं आकर्षित होते कि वो तुम्हें कुछ दे देगा।
श्रोता ४: सत्य?
वक्ता: सत्य? तुम! उसके अलावा कोई सत्य नहीं है, बाकी सब झूठ है।
श्रोता ४: सर, अगर हम कहें कि हम नहीं हैं, हमारी आत्मा है?
वक्ता: जानते हो उसको?
श्रोता ४: सर, जानते तो नहीं हैं।
वक्ता: तो फिर कैसे कह दिया कि है? कैसे पता कि है भी? आ-त-मा, क्या? कहाँ?
श्रोता ४: जो हमारी चेतना में स्थित है।
वक्ता: चेतना कहाँ है?
श्रोता ५: जो हमारी ऊर्जा का स्रोत है।
वक्ता: तुम्हारी ऊर्जा का स्रोत तुम्हारा खाना है, और सारी ऊर्जा, ब्रह्माण्ड की जो है, उसका स्रोत वो सूरज है।
श्रोता ५: हमारी ऊर्जा का स्रोत परमात्मा है।
वक्ता: आज पहला ही सवाल आया था कि हम जानते कुछ नहीं है, हमने मान बहुत कुछ लिया है।
श्रोता ६: सुनी, सुनाई बातें।
वक्ता: पता हमें कुछ है नहीं और शब्दों को हम फ़ुटबाल की तरह उछाल रहे हैं। कितने सारे तो आ गए? देखो, जैसे वो एक होता नहीं है सर्कस में, कितनी सारी गेंदें एक के बाद एक उछाल रहा होता है; सत्य, त्याग, प्रेम, राष्ट्र, आत्मा, परमात्मा…!
श्रोता ६: नैतिकता।
वक्ता: तुम्हें इसका कुछ पता है? कितना सुना-सुनाया जीवन है ये? कुछ पता है?
श्रोता ६: क्या इसे जानने की आवश्यकता भी है?
वक्ता: ये भी हो सकता है, ठीक कहता है, हो सकता है कोई आवश्यकता ही न हो, ठीक कहता है। आवश्यकता है, ये भी तुम्हें कहाँ पता है? अपने जीवन को देखो, उतना काफी है। शब्दों में उलझ के फायदा नहीं है, मैं यहाँ पर बैठ के तुमसे औपनिषदिक चर्चा कर सकता हूँ, और तुमसे ये बोलूँ कि ब्रह्म का ये अर्थ है, आत्मा का ये अर्थ है, जगत ये होता है, माया ये होती है, उससे बहुत कुछ मिलेगा नहीं, उस सबसे ज्यादा बेहतर है कि जो तुम सुबह से शाम तक जो करते हो, ये प्लेसमेंट की भाग-दौड़, ये मार्क्स की जद्दो-जहद, ये लड़के-लड़कियों के पीछे भागना, क्लासरूम में बोर हो कर बैठे रहना, ये जो शोर हो रहा है, तुम बस इसी पर ध्यान दे लो सुबह से शाम तक जो करते हो। इतने में सब समझ में आ जाएगा। बाकी इधर-उधर जाकर आत्मा-परमात्मा करने की कोई जरूरत नहीं है।
श्रोता ७: पर इसकी जरूरत क्या है?
वक्ता: इसकी है जरूरत, क्योंकि थोड़ी देर में यही शोर तुम कर रहे होंगे, तुम्हारे लिए आवश्यक है कि होश में रहो और जानो कि मैं ऐसा क्यों हो जाता हूँ। क्योंकि जीवन तुम्हारा है, आवश्यकता है, तुम्हें ही जीना है इसलिए आवश्यकता है।
श्रोता ७: जीवन-यापन करने के लिए तो जरूरी नहीं कि ये सब जाने?
वक्ता: जीवन-यापन नहीं, जीवन प्रतिपल है। यापन का मतलब हुआ कि कुछ कमा के खाना है।
श्रोता ७: अगर आवश्यकता की बात है तो आवश्यकता तो इस बात की भी नहीं है कि हम इंजीनिअर बने?
वक्ता: बिल्कुल भी नहीं है, ये जानो लेकिन, तुम यहाँ बैठे हो, इसका अर्थ क्या है? कि आवश्यकता नहीं है, फिर भी करे जा रहे हो, यही बेवकूफी। जीवन ये है, आत्मा-परमात्मा नहीं है, ये, स्पष्ट, सामने, डायरेक्ट, अभी, इसी पल, क्या चल रहा है? यही है जीवन, थोड़ी देर में अभी बाहर हो जाओगे फिर देखना कि कैसे हो जाओगे? जब घर जाओगे तो सड़क पर कैसे रहोगे? देखना, वो है जीवन।
– ‘संवाद’ पर आधारित। स्पष्टता हेतु कुछ अंश प्रक्षिप्त हैं।
संवाद देखें: सिद्धांतों को छोड़ो, जीवन को देखो
इस विषय पर और लेख पढ़ें:
1: आनंद हो संबंधों का आधार 
2: दूसरों को आदर्श बनाने की जगह खुद को देखो
3: आपके जाने के बाद भूल क्यों जाता हूँ? 
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Vivek पर जुलाई 3, 2017 को 5:02 अपराह्न
आपके विचार काफी क्रांतिकारी हैं l धन्यवाद l
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Acharya Prashant (आचार्य प्रशांत) पर जुलाई 3, 2017 को 5:02 अपराह्न
प्रिय विवेक जी,
प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन की ओर से हार्दिक अभिनन्दन! यह चैनल प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के स्वयंसेवियों द्वारा संचालित किया जाता है एवं यह उत्तर भी उनकी ओर से आ रहा है | बहुत ख़ुशी की बात है कि आप आचार्य जी के अमूल्य वचनों से लाभान्वित हो रहें हैं| फाउंडेशन बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित करना चाहता है कि निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:
1. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार: यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है। इस विलक्षण अवसर का लाभ उठाने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91-9818585917
2: अद्वैत बोध शिविर: प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन द्वारा आयोजित अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अलौकिक अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित ३५+ बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
इसके अतिरिक्त, हम बच्चों और माता-पिता के रिश्तों में प्रगाढ़ता लाने हेतु समर्पित बोध-शिविर का आयोजन करते हैं। इन शिविरों का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661
3. आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण: आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं। सत्र का हिस्सा बनने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com या संपर्क करें: श्री अपार: +91-9818591240
4. जागृति माह: फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित आधारभूत विषयों पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से स्काइप या वेबिनार द्वारा, चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं। सम्मिलित होने हेतु ईमेल करें: requests@prashantadvait.com पर या संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन:+91-9818585917
आशा है कि आप उपरोक्त माध्यमों के द्वारा आचार्य जी से बेहतर रूप से जुड़कर उनके आशीर्वचनों से कृतार्थ हो पाएंगे।
सप्रेम,
प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन
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आगामी कार्यक्रम
चल बुल्लेया
बुल्ले शाह पर आध्यात्मिक प्रवचनमाला
प्रारंभ हो रहा है 8 जनवरी से (ऑनलाइन सत्र भी उपलब्ध हैं)
भाग लेने के लिए,
requests@prashantadvait.com पर ईमेल करें
या संपर्क करें:
+91-8376055661
फ्री-हार्ट्स शिविर
आचार्य जी के सानिध्य में रहने का सुनहरा मौका
तिथि: 17 – 19 फ़रवरी
स्थान: शिवपुरी, ऋषिकेश, उत्तराखंड
आवेदन भेजने हेतु: requests@anubodhfoundation.org पर ईमेल करें
या संपर्क करें: श्री अपार
+91-9818591240
चल बुल्लेया
बुल्ले शाह पर आध्यात्मिक प्रवचनमाला
प्रारंभ हो रहा है 8 जनवरी से (ऑनलाइन सत्र भी उपलब्ध हैं)
भाग लेने के लिए,
requests@prashantadvait.com पर ईमेल करें
या संपर्क करें:
+91-8376055661
40वां अद्वैत बोध शिविर
आचार्य जी के सानिध्य में रहने का सुनहरा मौका
तिथि: 26-29 जनवरी
स्थान: ऋषिकेश, उत्तराखंड
आवेदन भेजने हेतु: requests@prashantadvait.com पर ईमेल करें
या संपर्क करें: अंशु शर्मा
+91-8376055661
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