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ध्यान क्या है? - What is meditation

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ध्यान क्या है? - What is meditation

बुद्ध से कोई पूछता है, बुद्ध आपने ध्यान से क्या पाया? बुद्ध का उत्तर सुन कर चोंक जाते हैं सब लोग। एक बार बुद्ध के कुछ भिक्षु बुद्ध से पूछते हैं, बुद्ध आपने ध्यान से क्या पाया? बुद्ध उनकी तरफ देखते हैं और मुस्कुराते हैं। बुद्ध कहते हैं मैंने ध्यान से कुछ नहीं पाया। सभी भिक्षु बुद्ध का उत्तर सुन आश्चर्यचकित होते हैं। क्योंकि उन्होंने हमेशा से यह सुना था कि ध्यान में हमें वह सम्पदा मिलती है, जो दुनिया की हर सम्पदा से बहुत बड़ी है। परन्तु बुद्ध तो यह कह रहे थे कि उन्हें ध्यान से कुछ भी प्राप्त न हुआ। इसलिए वे थोड़े चिंतित होते हैं।

बुद्ध अपने भिक्षुओं की व्याकुलता देख, उनसे कहते हैं मैंने ध्यान से कुछ पाया तो नहीं, परन्तु अपना सब कुछ खो दिया। बुद्ध के भिक्षु बुद्ध के ये वचन सुनकर और भी चिंतित होने लगते हैं। वे बुद्ध से कहते हैं, बुद्ध कृपा कर विस्तार से समझाएं? 

बुद्ध कहते हैं, क्रोध खोया, भय खोया, चिंता खोई, वासना खोई, लोभ खोया मोह खोया।यहां तक कि कुछ खोने का डर भी खोया और मृत्यु का डर भी खोया। बुद्ध कहते हैं हमारे जीवन की समस्या का कारण ये नहीं है कि जो हम चाहते हैं वो हमें मिल नहीं पा रहा है। हमारे जीवन की समस्या का सिर्फ एक कारण है कि जो हम से छूट रहा है, हम उसे छोड़ने को तैयार नहीं हैं। अगर हम इस एक चीज को सीख जाएं कि जो हम से छूट रहा है उसे छोड़ना सीख जाएँ, तो हम कुछ नया पा सकते हैं। हर व्यक्ति कुछ नया पाना तो चाहता है, परन्तु पुराना छोड़ने को तैयार नहीं। इसी कारण वह न तो नए को भोग पा रहा है न पुराने को ही। ज्यादातर लोग ध्यान करते वक़्त सिर्फ ये एक गलती करते हैं कि वो ध्यान में कुछ देखना चाहते हैं। वह ध्यान में कुछ पाना चाहते हैं। अपने दिमाग में या बाहर भी चीजों को न छोड़ना केवल एक चीज को दर्शाता है। कि मनुष्य सत्य को स्वीकार नहीं करता। वो जानता है कि मैं कितना भी न चाहूँ पर एक दिन ये सब चीजें मुझ से दूर हो जाएंगी। जिन्हें मैं एक क्षण के लिए भी अपने आप से दूर नहीं करना चाहता। चाहे वह दिमाग के स्तर पर हो या बाहर की दुनिया में। परन्तु जब तक वह इस सच को स्वीकार नहीं करेगा कि चीजें छूटेंगी। चाहे वह भीतर हो या बाहर। तभी कुछ नया प्राप्त हो सकता है।

मैं तुम से सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ। यदि ध्यान में तुम्हें मैं भी मिल जाऊं तो मुझे भी नकार देना। क्योंकि मैं भी तुम्हारा कोई सहयोग नहीं कर सकता। 

यह मार्ग केवल तुम्हारा है। और तुम ही इस पर चल कर अपने आप को जान सकते हो।
इसलिए ध्यान को कुछ पाने के लिए न करके इस बोझे को छोड़ने के लिए करो। जो तुमने अपने ऊपर लादा हुआ है। जिसे तुम ढोए फिरते हो। तब तुम कुछ नया जान सकोगे। तब तुम कुछ अलग जान सकोगे।
सभी भिक्षु बुद्ध को धन्यवाद कहते हैं। और बुद्ध से कहते हैं बुद्ध, आज हम समझ गए हैं कि ध्यान क्या है? ओर इसे कैसे करना है? धन्यवाद बुद्ध, आपका बहुत बहुत धन्यवाद। तो ध्यान का उद्देश्य कुछ पाने की बजाए जो इकट्ठा किया हुआ है, उसे छोड़ना बनाएं। तब आप ध्यान में वास्तव में कुछ नया पा सकेंगे।
धन्यवाद।
संग्रहकर्त्ता उमेद सिंह सिंगल।

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