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सब रोगों की एक दवाई, पर खानी इतनी आसान नहीं-Kabir Ke Shabd

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द
सब रोगों की एक दवाई, पर खानी इतनी आसान नहीं।
जो खावै जीवत मर जावै, फेर जीवन का काम नहीं।।

जाके पिये से अमर हो जाए, हरि रस ऐसा रे।
आगे आगे दो जलें रे, पीछे हरियल होय।
बलिहारी उस वृक्ष की रे, जड़ काटे फल होय।।

हरि रस महंगे मौल का रे, पीवै विरला कोय।
हरि रस को तो वो जन पीवै, धड़ पे शीश ना होय।।

भक्ति करो तो कुल नहीं रे, कुल बिन भक्ति न होय।
दो घोड़ों के ऊपर हमने, चढ़ा ना देखा कोय।।

भक्ति करो और कुल रहो रे, अड़े रहो दरबार।
दो घोड़ां की कौन चलावै, चारों पर असवार।।

हरिरस जिनने पी लिया रे, हुआ भँव दुख का नाश।
दास कबीरा ऐसा पिया, और पीवन की आश।।

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