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इस मोहमाया की धार में, कोय विरला ए सन्त तरेगा-Kabir Ke Shabd-es mohmaayaa ki dhaar men, koy virlaa aye sant taregaa।।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द
इस मोहमाया की धार में, कोय विरला ए सन्त तरेगा।।
रावण जैसे पंडित फहगे, बडे-२ ज्ञानी चंद भी बहगे।
दुर्वासा मझधार में क्यों, जप तप और योग करेगा।।

आशा तृष्णा ममता माया, मिल पाँचा संग जाल फैलाया।
पच्चीस के परिवार में तूँ, फंदे बीच फँसेगा।।

न्हावै तो न्हा निर्मल जल में। मूर्ख आप फँसा दलदल में।
गर्भ गुमानी कार में तेरा, कैसे रूप खिलेगा।।

रे पगले तेरा ध्यान कड़े सै, कित ढूंढे भगवान कड़े सै।
सत्संग शील विचार के कोय आवागमन तरेगा।।

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