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निंदक यार हमारा साधो, निंदक यार हमारा-Kabir Ke Shabd-nindak yaar hamaaraa saadho, nindak yaar hamaaraa।

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Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द
निंदक यार हमारा साधो, निंदक यार हमारा।
निंदक को नियरे ही राखो, होण नहीं दो न्यारा।।

पीछै निंदा कर अघ धोवै, सुन मन मिटै विकारा।
जैसे सोना ताप अग्नि में, निर्मल करै सुनारा।।

घन आहरण कर हीरा निपजै, कीमत लाख हज़ारा।
ऐसे परखै दुष्ट सन्त को, करै जगत उजियाला।।

योग यज्ञ तप पाप कटन तैं, करै सफल सँसारा।
बिन करनी मय कर्म कठिन सब, मेटै निंदक प्यारा।।

सुखी रहो निंदक जग माहीं, रोग न हो तन सारा।
म्हारी निंदा करने वाला,  उतरो भँव जल पारा।।

निंदक के चरणों की पूजा, करूँ मैं बारम्बारा।
चरणदास कह सुनियो साधो, निंदक साधक भारा।।

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