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नियम-पालन का लाभ-Benefit of following rules

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नियम-पालन का लाभ

एक गाँव में एक साधु आये। उन्हें पता लगा कि गाँव में एक ऐसा व्यक्ति है जो किसी प्रकार के आचार विचार, व्रत-नियम को मानता ही नहीं । साधु ने उसे बुलवाया और समझाया-'जीवन में कोई एक नियम अवश्य होना चाहिये। तुम कोई एक नियम बना लो ऐसा नियम जो तुम्हें सबसे सुगम जान पड़े । 

वह व्यक्ति बोला-" मुझसे कोई नियम-पालन नहीं हो सकता; किंतु आप कहते ही हैँ तो यह नियम बना  लेता हूँ कि अपने घर के पास रहने वाले कुम्हार का मुख  देखकर ही भोजन करूँगा ।'

साधू ने स्वीकार कर लिया। साधु तो चले गये और उसका नियम भी चलता रहा; किंतु एक दिन उसे किसी काम से कुछ रात्रि रहते ही घर से दूर जाना पड़ा। जब वह लौटा तो दो पहर बीत चुका था । कुम्हार गाँव से दूर मिट्टी खोदने चला गया था बर्तन बनाने के लिये। परंतु उसे अपना नियम-पालन करना था। वह कुम्हार की खोज में चल पड़ा क्योंकि उसे भूख लगी थी और उस कुम्हार का मुख देखे बिना उसे भोजन करना नहीं था। 

व्यक्ति पहुँचा।  उस दिन मिट्टी खोदते समय कुम्हार को अशर्फियो से भरा घडा मिला। उस घड़े की अशफियों को  वह गधे की भोरी में भर रहा था, यह देखकर कुछ दूर से ही कुम्हार का मुख देखकर यह लौटने लगा । रात्रि में ले जाने के लिये, कुम्हार को लगा कि इसने उसे अशफी भरते इतने में यह देख लिया है । दूसरों से यह न बता दे, इस भय से उसे पुकारा और घड़े का आधा धन उसे दे दिया। एक साधारण नियम के पालन से इतना लाभ हुआ 
 उसी दिन से वह व्रतादि समी धार्मिक नियमोंका मालन करने लगा । -सु० सिं० 

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