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फलने का मौका देना चाहिये-Should be allowed to flourish

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फलने का मौका देना चाहिये

किसी वस्तु को रखने या हटा देने के सम्बन्ध में  बहुत सोच-समझकर निर्णय करने से बड़े-से-बड़ा लाभ होते देखा गया है। 
बहुत पहले को बात है । एक व्यक्ति ने अपने अंगूर के बगीचे में एक अंजीर का पेड़ लगा रखा था। बहुत दिनों से उसमें फल नहीं लगे थे।

यह पेड़ निरर्थक सिद्ध हुआ । इसने इतनी जमीन  व्यर्थ घेर रखी है । तीन साल हो गये, पर इस ठूठ में  एक फल भी नहीं लगा। इसे काट डालो। बगीचे के मालिक ने माली को आदेश दिया।

मालिक एक साल का और मौका दीजिये। मैं इसके चारो और थाला बनाऊंगा। पानी और खाद दूंगा। हो सकता है कि हमारी एक साल की प्रतीक्षा फलवती हो जाए और इस ठूठ में नए प्राण लहर उठे। माली ने मालिक से प्रार्थना की ।

उसे विश्वास दिलाया की यदि इसमे फल नहीं लगेंगे तो काट डालूँगा।

तुम ठीक कहते हो, माली ! प्रतीक्षा से भी  सफ़लता मिलती है । मालिक ने आदेश बदल दिया।  उसे फल की आशा थी और सचमुच अगली साल फल लग गये।

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