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अंदर अनमोला रे लाल - andar anmol re lal - kabir ke shabd

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द

अंदर अनमोला रे लाल, हरदम माला फेरियो जी।।
बिन तागे तेरी तसबीह पोइ, बिना सार तावीज।
अंदर सुमरनी फेरी कोन्या, रहा है काट पे रीझ।।

मरके ज़िक्र मिटे सब तेरा, मरके फेरो जीव।
लाख दुहाई तनैतेरे सद्गुरु की, तुझ में ही है तेरा पीव।
पहलम आपा चेतिये रे, फेर मुंडाइये मूँड़।
ईधर उधर को क्या देखत है, इसी ढूंढ़ में ढूंढ़।।

21606 कहिये, चाँद सूरज के बीच।
नो दरवाजे प्रगट दिखें, दसवें में जगदीश।।
मोजी साध बन्दगी वाकी, ज्ञान दियो उपदेश।
कल्लन शाह ने सैन लखाई, दिल अंदर प्रवेश।।

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