loading...

भजन बिना के उठेगा - bhajan bina ke uthega - Kabir ke shabd

Share:
SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द

भजन बिना के उठेगा, तेरी झूठी बौर बड़ाई का।
वक्त लिकड़ गया ज्ञान हुआ जब, जीवन की सच्चाई का।।

एक बूंद से गर्भ बनाया, धन कारीगर करतार तनै।
पाँच तत्व और तीन गुणों से, करा पुतला त्यार तनै।
हाड़ मांस की ईंट जचाई, लइ खून की गार तनै।
इस 206 का जोड़ मिलाया, के बरते ओजार तनै।
नो महीने तक रात दिनां-२ तेरा चाल्या काम चिनाई का।।

ये क्या दीखे और कौन देखता, ये भी अचरज भारी है।
कौन बोल रहा कौन सुनै, मेरी नहीं समझ में आ रही है।
सांस का आना जाना देखो,चौबीस घण्टे जारी है।
सबकुछ पीस दियाचाकी ने, किसेपाने पाट पिना रही है।
एक मिनट भी रुकता कोन्या, इसका काम पिसाई का।।

निराकार साकार के अंदर, या काया नाम धराय रही।
मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारे में, या दुनिया ढोल बजाए रही।
मन का राज हुआ दुनिया में, यूँ सृष्टि धोखा खाए रही।
बुद्धि रूप स्वार्थ के हो सै, या खुद का स्वार्थ चाह रही।
सच्चा ज्ञान कहा सन्तों ने, इस सुरतां कि चतुराई का।।

सच्चा सद्गुरु आप मेट दे, अज्ञान अंधेरे काले नै।
पग-२, पर मेरी दया लइ, मेरे सतप्रकाश रुखाले नै।
दादा जगन्नाथ की मेहर फिरी, गया तोड़ कर्म के ताले नै
चरण पकड़ के कलम उठाली, विकास पाहसौर आले नै
या सुरति देखै चित्त चितावै, मेरा खाली काम लिखाई का।

कोई टिप्पणी नहीं