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बुद्ध को सत्य प्राप्त - Buddha found the truth story in hindi

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बुद्ध को सत्य प्राप्त - Buddha found the truth story in hindi

सत्य प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ जो कि अब बुद्ध हो चुके थे। वो तय करते हैं कि इस सत्य को मैं खुद तक नहीं रखूँगा। मैं इस सत्य को हर उस व्यक्ति तक पहुँचाऊँगा। जो व्यक्ति दुख से गुजर रहा है। और अपने पहले उपदेश के बाद सिद्धार्थ सत्य को फैलाने के लिए वहां से चल देते हैं। रास्ते मे सिद्धार्थ को एक व्यक्ति ध्यान करता हुआ दिखता है। सिद्धार्थ उस व्यक्ति के पास जाकर बैठ जाते हैं। मात्र सिद्धार्थ के वहां होने के कारण ही उस व्यक्ति को कुछ अजीब सा अनुभव होता है। वो व्यक्ति अपनी आँखें खोलता है और सिद्धार्थ के आगे हाथ जोड़ कर खड़ा होता है और कहता है। हे मुनिवर आप कौन हैं? और आपके चेहरे पर इतना तेज कैसे? आपने कौन सा तप किया है और आपके गुरु कौन हैं? क्या आपने परम् सत्य को पा लिया है? वो व्यक्ति पूछता है, तो आप मुझे जल्दी बताइये कि आप के गुरु कौन हैं? 


सिद्धार्थ कहते हैं, मेरे कई गुरु रह चुके हैं। जिन्होंने मुझे प्राथमिक शिक्षाऐं दी। परन्तु परम् सत्य पाने की खोज में मेरा कोई गुरु नहीं था। सत्य मैंने स्वयं ही पाया है।


इस बात को सुनकर वह व्यक्ति क्रोधित होता है, और कहता है आप कैसे पुरुष हैं? आप अपने गुरु का नाम नहीं बताना चाहते। आपको लज्जा नहीं आती अपने गुरु का नाम छुपाते हुए। आप अपने गुरु का श्रेय खुद ही लेना चाहते हैं। आप ऐसा कैसे कर सकते हैं? क्या आपके भीतर तनिक भी मनुष्यता नहीं है।

और वह व्यक्ति बुद्ध से कहता है कि मैंने ख्वामख्वाह ही आपसे बात करके अपना समय बर्बाद किया। जाइये यहां से। और सिद्धार्थ उसकी और मुस्कुराकर वहाँ से चल देते हैं। 

ऐसा नहीं था कि बुद्ध के पास उसके किसी भी सवाल का जवाब नहीं था। परन्तु सबसे जरुरी बात वहां पर ये थी कि क्या बुद्ध वहाँ पर कुछ समझाने गए थे? नहीं। बुद्ध ने सिर्फ सच कहा था। जिसे वह व्यक्ति स्वीकार ही न कर सका। यही समस्या बहुत सारे लोगों के साथ होती है। वे सोचते हैं कि जो हम मानते हैं वो ही सही है। उसके अलावा और जो कुछ भी है वो गलत है।

ऐसा नहीं होता? कभी कभी बहुत सारी चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें हम कल्पना में भी नहीं सोच सकते। परन्तु वे सही होती हैं। अब आप सोच रहे होंगे। बुद्ध वहाँ से चले गए। हम यह जानना चाहते हैं। कि क्या उस व्यक्ति को पता लगता है कि क्या बुद्ध वास्तव में सत्य को जान चुके हैं। तो बाद में तो उस व्यक्ति को पता लग ही जाता है। जब बुद्ध के हज़ारों अनुयायी हो जाते हैं। परन्तु एक बात और आप समझें और सीखें। मैं जानता हूँ कि बुद्ध सच बोल रहे हैं। बुद्ध जानते हैं कि वे 1% भी गलत नहीं हैं। परन्तु फिर भी उन्होंने एक भी शब्द अपने मुँह से अपने आप को सही साबित करने के लिए नहीं निकाला। और यह एक बहुत बडी सीख है आज के समय में लोग अपनी गलत बात को साबित करने के लिए बोलते बोलते दूसरे इंसान के शब्द को सुनते नहीं।

बुद्ध जानते थे कि मैं सही हूँ, सच बोल रहा हूँ। परन्तु बुद्ध एक शब्द भी नहीं बोले। अंत में वह व्यक्ति जानता है कि बुद्ध सच बोल रहे थे।परन्तु बुद्ध ने अपने मुँह से नहीं बोला। ये एक बहुत बड़ी सीख है।

बुद्ध ने बस वही बोला जो वास्तविकता थीं। एक और बहुत बड़ी सीख जो हमें इस कहानी इस घटना से मिलती है। वो ये कि बुद्ध जहां भी पहली बार गए। सभी लोग उनको देखकर उनकी तरफ आकर्षित हुए। परन्तु जब वो बोलते थे उससे वह लोग सहमत नहीं हो पाते थे क्योंकि वो लोगों के विचारों से बिल्कुल अलग बोल रहे थे। वे लोगों की सोच से बिल्कुल विपरीत बोल रहे थे। इसलिए लोग बुद्ध से शुरुआत में सहमत नहीं हो पाते थे। परन्तु जो भी व्यक्ति बुद्ध के कुछ शब्द भी सुन लेता था, वह व्यक्ति धीरे धीरे बुद्ध की बात को मानने लगता था। ये एक सच्चाई है। इसे आप जितनी जल्दी से स्वीकार कर लें उतना ही आप के लिए बेहतर है। अगर आप भीतर में किसी चीज के लिए सच मे ऑनेस्ट हैं, सच्चे हैं। आप सही हैं तो हो सकता है कि शुरुआत में लोग आपको अपमानित करें। परन्तु अंत हमेशा आप के हिसाब से ही होगा।

आशा करता हूँ बुद्ध के जीवन की इस घटना से आपको कई सीखें मिली होंगी। और आप सभी सीखों को अपने जीवन के अंदर उतारेंगे। और अपने जीवन को बेहतर बनाएंगे।

धन्यवाद
संग्रहकर्त्ता उमेद सिंह सिंघल।

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