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गुरु थारे बिना बिगड़ी ने - guru thare bina bigdi ne - Kabir Ke Shabd

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द

गुरु थारे बिना बिगड़ी ने कौन सँवारे।
एक दिन बिगड़ी पिता पुत्र में, बांध खम्ब के मारे।
अपने भक्त की सहाय करन ने, नृसिंह देही धारे।।

एक दिन बिगड़ी राजसभा में,द्रोपदी नाम पुकारे।
वा के चीर अनन्त बढाए, दुष्ट दुःशासन हारे।।

एक दिन बिगड़ी जन नरसी की, समधी जी के द्वारे।
आए साँवरिया भात भरा, भक्त के कारज सारे।

ज्यूँ ज्यूँ भीड़ पड़ी भक्तन पर, त्युं त्युं विपत सँहारे।
घिसा सन्त करो गुरु कृपा, जीतादास पुकारे।।

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