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हे सुरतां चल देख दीवाना देश hey surta chal dekh diwana desh - kabir ke shabd

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Kabir Ke Shabd 


कबीर के शब्द

हे सुरतां चल देख दीवाना देश,
जहां मोह ममता माया ना।

गर्मी शर्दी भूख प्यास ना, आंहे कोए तृष्णा रह आश ना।
हे सुरतां तेरा कटजा कर्म क्लेश, लगै तनै धूप और छाया ना।।

त्रिकुटी महल पुरूष एक राजा, सुन धुन मुरली बाजै बाजा
हे सुरतां पचे ब्रह्मा विष्णु महेश, भेद नारद नै पाया ना।।

आंहे आपे में आप समाना, आगे तीसरे तिल से जाना।
हे सुरतां कर सचखंड में प्रवेश आत्मा, जाती काया ना।।

कृष्ण लाल गिरावड वाला, कोटि भान हुआ उजियाला।
हे सुरतां ना चले काल की पेश, गया जो उल्टा आया ना।।

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