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हो ज्ञान बिना - ho gyan bina - kabir ke shabd

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 


कबीर के शब्द

हो ज्ञान बिना मनुष्य बने हैं ढोर।
भागा दौड़ी करता डोलै, शाम गिने नहीं भोर।
अपना पेट तो पशु भी पाले, देखो करके गौर।।

कुटुंब कबीला देख के फुला, बंधा ममता की डोर।
यो भी मेरा, वो भी मेरा, खूब लगा रहा जोर।।

मरना याद कदे न आता, बोलै वचन कठोर।
बेटे पोता कै कसर पड़ेगी, धरती ले लू और।।

बूढ़ा होग्या थके पराक्रम, मारा करता बोर।
यम के दूत फिरें चोगिरदे, पकड़ लिया ज्यूँ चोर।।

गुरु रामसिंह से नहीं मिला तूँ, अब ना चाले जोर।
ताराचंद गुरु शब्द सुनावै, उठन लगी हिलोर।।

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