loading...

इस सत्संग रूपी लाल की कोए - is satsant rupi lal ki koye - Kabir Ke Shabd

Share:
SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द

इस सत्संग रूपी लाल की कोए,
कदर करेगा जोहरी।
के जाने कोए मूर्ख बनिया,
बेच रहाहो सूंठ और धनिया।
होवे लाल बतावे मनिया,
बिन राजा सजै न पालकी।
के बैठ सके कोए छोहरी।।

बेच रहा हो मूली गाजर,
के जोहरी के होए बराबर।
कहाँ लेट और कहाँ है सागर,
तनै खबर ना अपने माल की।
नित उठ के हो रही चोरी।।

कहाँ है पारस कहाँ है रोड़ा,
कहाँ गधा और कहाँ है घोड़ा।
इन दोनों का ना मिलता जोड़ा।
तनै खबर ना अपने माल की।
न्यूए धींगा मस्ती हो रही।।

सद्गुरु जोहरी पे जो जावै,
वो लालां की खबर बतावै।
हरिदास न्यू कथ के गावै,
तेरे सिर पे घुन्डी काल की,
भाजेगा कौन सी मोरी।।

कोई टिप्पणी नहीं