loading...

बहुत दूर वो घर है साधो, बहुत दूर वो घर है-Kabir Ke Shabd-bahut dur vo ghar hai saadho, bahut dur vo ghar hai।

Share:
SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
बहुत दूर वो घर है साधो, बहुत दूर वो घर है।
क्या गावे कुछ समझ दीवाने, मुश्किल गैब शिरर है।

ध्रुव प्रह्लाद धनी की धुन पर, तजा देह का डर है।
महादेव ने भख्या हलाहल, बौरा आठ पहर है।

गोरख गोपीचन्द भरथरी, लिया ठेकड़ा कर है।
दास कबीर सत्त नहीं छोड़ा,  दिया सब वस्त्र है।

मनसुरा सूली पर चढ़िया, जब पहुंचा उस दर है।
. शेख फरीद कुए के अंदर,काया गया बिसर है।।

सुल्तानी साहब मिलने को, तज्या माल और जर है।
घर-२भीख मग्न हो मांगी, रब्ब इश्क ऊपर है।।

नामदेव तन त्यागन लाग्या, पिया दूध पत्थर है।
पीपा जाय द्वारका परसे, कूद पड़ा सागर है।।

सेउ सम्मन सांचे सेवक, जिनकी बात अमर है।
दादू दोनों हद्द छोड़कर,  राखी आश अधर है।।

जैसे सती न फेर घर आवे, यूँ सिर दे तो नर है।
नित्यानन्द महबूब गुमानी, यही कहीं बरबर है।।

कोई टिप्पणी नहीं