loading...

बंगला अजब बनाया खूब,अवगत पार ब्रह्म महबूब-Kabir Ke Shabd-banglaa ajab banaayaa khub,avagat paar brahm mahbub।

Share:
SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
बंगला अजब बनाया खूब,अवगत पार ब्रह्म महबूब।
गैब माहीं से गुप्त प्रेम धर,फेर प्रकट कर लाया।
नाद की ईंट बिंद का गारा, ऐसा चरित्र दिखाया।।

भांति-२ के खुले झरोखे,शोभा भली बनाई।
चौदह लोक द्वार पै चमकें,चेतन करी चतराई।।

जागरण स्वप्न सुषुप्ति तूरया,ड्योढ़ी चार लगाई।
पिंजर पांच पचीसों खिड़की,सुखमन सेज बिछाई।।

सीढ़ी शब्द मुक्त दरवाजा,तीन देव दरबाना।
भीतर निर्गुण नूर विराजे,निराकार निर्वाणा।।

परा पश्यंती मध्य वैखरी,छूटें चार फ़ौहारा।
शब्द कुलावे अमृत उतरे,कौतुक करे पियारा।।

बंगले अंदर साहब सुंदर,बंसी सुघर बजावे।
आठों पहर अखण्ड एकरस,सोहं-२ गावै।।

इस बंगले में मिले गुमानी,अगम सैन समझावै।
नित्यानन्द सो सोहं होकर,युग युग रहै समावै।।

कोई टिप्पणी नहीं