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बीत गई सो बात गई रे, मत करना अभिमान-Kabir Ke Shabd-bit gayi so baat gayi re, mat karnaa abhimaan।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
बीत गई सो बात गई रे, मत करना अभिमान।
बन्दे लगा हरि में ध्यान।।

ना रही जगमे नाम निशानी, रावण बना था जब अभिमानी।
तुझ संग बने यही कहानी,सोच जरा नादान।।

कौन किलाजो ढहनहीं पाया,कालके संग जो बह नहींपाया।
यहां सदा कोई रह नहीं पाया,दो दिन का महमान।।

मोह माया का ताना बाना, किस में फंस के हुआ दिवाना
हार सिकन्दर गया यहां से, था वो बली महान।।

ज्यादा बीती रह गई थोड़ी,प्रीत पृभु से क्यों नहीं जोड़ी।
सब को चढ़ना काठ की घोड़ी, मंजिल है शमशानं।।

हर कुनबे की ममता छूटी, रामनाम की पिले बूंटी।
जिस दिन डोर सांस की टूटी, छूटे जगत जहान।।

ये दुनिया एक सर्कस मेला,अपना-२ खेल है खेला।
उड़ जाएगा हंस अकेला,काया रेत समान।।

दूत कमलसिंह,यम के आवें,उनसे कोई बच न पाए।
धर्मराज की लगै कचहड़ी, होगा इमतिहान।।

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