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चल हंसा उस देश, समन्द बिच मौति है-Kabir Ke Shabd-chal hansaa us desh, samand bich mauti hai।

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Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द
चल हंसा उस देश, समन्द बिच मौति है।
चल हंसा वो देश निराला,बिन शशि भान रहे उजियाला।

लगे ना काल की चोट,जगामग ज्योंति है।
करूँ चलन की जब तैयारी,दुविधा जाल फसे अति भारी

हिम्मत कर पग धरूँ,हंसनी रोटी है।
चाल पड़ा जब दुविधा छूटी, पिछली प्रीत कुटुंब से टूटी।

सत्तरह रह गई पांच,धरन पर सूती है।
जाए किया अमरा पुर वासा,फेर ना रही आवन की आस
धरी कबीर मौत, के सिर पर जुती है 

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