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चली जा रही है जीवन की रेल-Kabir Ke Shabd-chali jaa rahi hai jivan ki rel।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
चली जा रही है जीवन की रेल।
समझ कर खिलौना इसे, यूँ ना खेल।।

कुशल कारीगर ने इसको बनाया।
बड़ी अक्लमन्दी से इसको चलाया।
पड़े इसके इंजन में कर्मों का तेल।।

किसी को चढाये किसी को उतारे।
घड़ी दो घड़ी के मुसाफिर हैं सारे।
यहीं पर जुदाई, यहीं पर हो मेल।।

जरा सी खराबी, अगर इसमे आए।
एक कदम भी ये सरकने न पाए।
सदा के लिये एक पल में हो फेल।।

न अपनी खुशी से लोग यहां आए।
मगर सबने आकर यहां दिन बिताए।
कोई समझे मन्दिर कोई समझे जेल।।

रहे कुछ सफर में रोते चिल्लाते।
मगर कुछ महापुरुष हंसते हंसाते।
गए हर मुसीबत को हिम्मत से झेल।।

पथिक रेलगाड़ी में जोभी चढा है।
कहीं न कहीं तो उतरना पड़ा है।
समय ने डाली सबको नकेल।।

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