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चरखा चले सूरत विरिहन का-Kabir Ke Shabd-charkhaa chale surat virihan kaa।

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Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
चरखा चले सूरत विरिहन का।
काया नगरी बनी अति सुंदर, महल बना चेतन का।
सूरत भाँवरा होत गगन में, पोधा ज्ञान रत्न का।।

चित चमरक त्रिगुण के तक़वा, माल मनोरथ मन का।
पूनी पांच पचीस रंग की, कुकड़ी नाम भजन का।

ढूंढ वैराग्य गाड़ कोए खूंटा, मंझा जोग जुगत का।
द्वादस नाम धरो दोई पंखुरी, हथिया सार शब्द का।।

महीन सूत सन्तजन कातें, मांझर प्रेम भक्ति का।
कह कबीर सुनो भई साधो, जुगन-२ सत मत का।।

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