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देही ने के धोवे मल मल के,ले ज्यागा काल मसलके-Kabir Ke Shabd-dehi ne ke dhove mal mal ke,le jyaagaa kaal masalke।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द
देही ने के धोवे मल मल के,ले ज्यागा काल मसलके।
खाए मलीदे फुले दीदे मोटा हो गया पल के।
मानस जूनि हर बिन सुनी,खोई बराबर खल के।।

आई जवानी मद प्रकाशा,त्रिया ला लई गल के।
जिसने मरणा सन्मुख दिखे,चालो सोच सम्भल के।।

काम करे जब प्यता लागे, कुनबा खा रलमिल के।
बूढ़ा हो जब परै हटा दें,सब चालें टल टल के।।

गई जवानी आया बुढ़ापा,नैना पानी ढलके।
बिजली केसा पलका लागे,ले जागा छल बल के।।

जो भव सागर पार उतरगे, हर का नाम सुमर के।
शोभा नाथ की कृपा हो गई,महत नाथ बेधड़के।।

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