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धीरज क्यों ना धरे, रे कंगले मन-Kabir Ke Shabd-dhiraj kyon naa dhare, re kangle man।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
धीरज क्यों ना धरे, रे कंगले मन।
कभी तो बून्द गगन में दरसे, कभी तलाव भरे।
कंकर पथर डूब रहेंगे, लोढा पार तरे।।

अजगर पड़ी धरन में लौटे, वा भी पेट भरे।
अलल पखेरू उड़ै गगन में, वो क्यूं ना भूख मरै।।

मंझारी सुत आवे में बैठे, सिर पै अगन जलै।
खम्ब पाड़ कै प्रगट होगे, नरसिंह रूप धरे।।

नरसी जी के सतगुरु स्वामी, आ के नै भात भरे।
कह कबीर दुनो भई साधो, सतगुरु पार करै।।

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