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हम हंसा उस ताल के जी, जहां मानक लहरी-Kabir Ke Shabd-ham hansaa us taal ke ji, jahaan maanak lahri।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
हम हंसा उस ताल के जी, जहां मानक लहरी।
हंसा तो मोती चुगे,बुगला मछली का वैरी।।

है कोए देशी म्हारे देश का, परखनिया जौहरी।
त्रिवेणी की धार में,सुरतां न्हा रही मोरी।।

पांच तत्व की हेली बनी रे, बीच रख दइ मोरी।
सुन्न शिखर में भया चांदना,लगी सोहं डोरी।।

चार चकुटे बाग में जी, बीच रख दइ मोरी।
बेल अंगुरां लाग रही,खिली केशर क्यारी।।

बारह मासी फल लगें, मीठा स्वाद चकफेरी।
ज्ञान शब्द की झाल रे,म्हारी नागिन जहरी।।

सत्त साहिब

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