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हम उन संतां के दास जिन्होंने मन मार लिया-Kabir Ke Shabd-ham un santaan ke daas jinhonne man maar liyaa

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द
हम उन संतां के दास जिन्होंने मन मार लिया
मन मारा तन वश किया जी, हुए भर्म भय दू
बाहर तो कुछ दिखे नाहीं,अंदर झलके नूर

काम क्रोध मद लोभ मार के,मेटी जग की आश
बलिहारी उन संतां की रे,प्रकट कियो प्रकाश

आपा मार जगत में बैठे,नहीं किसी से काम
उन में तो कुछ अंतर नाहीं संत कहो चाहे राम

प्याला पिया नाम का,दिया छोड़ जगत का मोह
हम को सतगुरु ऐसे मिल गए,सहज मुक्त गई होए

नरसी जी के सतगुरु स्वामी,दियो अमिरस प्याये
एक बूंद सागर में मिल गई,क्या कर ले यमराय

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