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हमारा दाता अपने ही उर में ,पाया जी-Kabir Ke Shabd-hamaaraa daataa apne hi ur men ,paayaa ji।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द
हमारा दाता अपने ही उर में ,पाया जी।
युगों-2 की मिटी कल्पना,सद्गुरु भेद बताया।

ज्यो कुँवरि कंठामणि भूषण,जाने कहाँ गंवाया।
एक सखी ने आन बताया,मन का भर्म नसाया।

ज्यों त्रिया सपने सूत खोया,जान के जी अकुलाया
जाग गई पलँगा पे पाया,कहीं गया ना कहीं आया।

ज्यों मृगा नाभि कस्तूरी,बन-2 ढूंढत ध्याया।
उलट सुगंध नाभि की लीन्ही,हार थका सकुचाया।

कह कबीर भाई गति सौई,ज्यों गूंगा गुड़ खाया
वा के स्वाद को कैसे बतावे,मन ही मन मुस्काया

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