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हमें कोए कातन देय सिखाय-Kabir Ke Shabd-hamen koa kaatan dey sikhaay।

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Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
हमें कोए कातन देय सिखाय।
कात ननदिया कात जिठनिया, कात पड़ोसन आय।
पूनी पांच पच्चीस रंग की, हमसे काती न जाये।।

ब्रह्मा काता विष्णु काता, नारद काता आय।
विश्वामित्र वशिष्ट दोऊं काता, तबहुँ न कात सिराय।।

तन के काते क्या भयो जो मन ही कात न पाय।
टिकवा साधन जो बन आवे, महंगे मौल बिकाय।।

बाला काता तरुणी काता, वृद्ध कातन जाय।
कह कबीर तीनों पन, चरखा धरा उठाये।।

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