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हमनै गुरु से मिलन रो घणो चाव,उमेदि घनी लाग रही-Kabir Ke Shabd-hamnai guru se milan ro ghano chaav,umedi ghani laag rahi।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
हमनै गुरु से मिलन रो घणो चाव,उमेदि घनी लाग रही।
हमे उमेदि न्यू लगी रे,ज्यूँ निर्धनिया धन हो।
जैसे बांझ पुत्र बिन तरसे,मैं तरसूं गुरु तोय।।

हरि रूठें तो रुठ जायँ, म्हारे सतगुरु रूठें ना।
सतगुरु म्हारे सन्त सामर्थ, हरि से वे देंगें मिलाय।।

नाव पड़ी मझधार में,गुरु अधबीच गोता खाय।
सतगुरु म्हारे बने खेवटिया,खेवेंगे पार लगाय।।

सतगुरु म्हारे समन्द हैं जी, हम गलियारो नीर।
बहतो नीर समन्द मिल जावे,कंचन भयो है शरीर।।

सतगुरु की कृपा हुई, म्हारो करो भजन में सीर।
रामानन्द की फ़ौज मैं रे, सम्मुख लड़े हैं कबीर।।

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