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हृदय बीच हरि है साधो,हृदय बीच हरि है - Kabir Ke Shabd-hriaday bich hari hai saadho,hriaday bich hari hai।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
हृदय बीच हरि है साधो,हृदय बीच हरि है।
तुझ ही भीतर साहब तेरा, सतगुरु खबर करी है।।

धर दूरबीन चश्म को फेरो,जगमग जोत जरी है।
कहीं-२ गुप्त किसी से प्रकट, सब घट वस्तु भरी है।।

साहब नूर नूर के सेवक,नूर ही की नगरी है।
सूक्ष्म सेज पर तेज चमके, सो घर प्रापरी है।।

सूरज करोड़ रोम की शोभा,जो छवि अधिक खड़ी है।
देवी देव भेव नहीं पावत,आत्म ब्रह्म बरी है।।

गंगा जमना मिली सुरस्ती, धारा अधर धरि है।
मार्ग मीन जाए घर पहुँचे, जिनकी भली सरी है।।

मकर तार पर मुरली बाजै,बरसत रंग झड़ी है।
तिल की ओट तमाशा देखै, हाजिर घड़ी-२ है।।

किये निहाल स्वामी गुमानी, जा पर मेहर फिरी है।
नित्यानन्द चरनाविन्द भज, तीनों ताप टरि है।।

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