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जिस नगरी म्हारे साहिब बैठे,वो बेगम पुर कैसा है-Kabir Ke Shabd-jis nagri mhaare saahib baithe,vo begam pur kaisaa hai।

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Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द
जिस नगरी म्हारे साहिब बैठे,वो बेगम पुर कैसा है।
है कोई ऐसा जाए मिलावे, हम को यही अंदेशा है।

बहुत दिनों से चाव हमारे, हर प्रीतम किध वेशां है।
चरण कमल हम कद लग परसाँ निरखे नूर नरेशां है।
नित्यानंद महबूब गुमानी,मिलते रहो हमेशां है।

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