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जो नैना अलख लखावै रे साधो, सो सतगुरु मोहे भावे हो जी-Kabir Ke Shabd-jo nainaa alakh lakhaavai re saadho, so sataguru mohe bhaave ho ji।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
जो नैना अलख लखावै रे साधो,  सो सतगुरु मोहे भावे हो जी।
डोलत डिगे न बोलत बिसरे,अस उपदेश दृढ़ावे।
प्राण पुंज किरया से न्यारा,सहज समाधि सिखावे।।

द्वार न रुंधे पवन न रोके,नहीं अनहद उरझावे।
ये मन जाए जहां लग जबही,परमात्म दरसावे।।

कर्म करे और रहे अकर्मी,ऐसी जुगत लखावै।
सदा विलास त्रास नहीं मन मे,भोग में योग जगावे।।

धरती त्याग आकाशहूं त्यागे,अधर मढैया छावै।
सुन्न शिखर की सार शिला पर,  आसन अचल जमावे।।

भीतर हो सो बाहर देखे, दूजा दृष्टि न आवे।।
कह कबीर सुनो भई साधो, आवागमन नसावे।।

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