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जोड़-२ भर लिए खजाने फिर भी तृष्णा अड़ी रही-Kabir Ke Shabd-jod-2 bhar lia khajaane phir bhi triashnaa adi rahi।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
जोड़-२ भर लिए खजाने फिर भी तृष्णा अड़ी रही।
धरे रहे तेरे रँगले बंगले, सूनी बारादरी रही।।

पहन पौशाक बांधके पगड़ी, हट्टी पे एक सेठ गया।
जाते ही एक चक्कर आया, पैर फला के लेट गया।।
चला गया वो लिखने वाला, कलम कान में पड़ी रही।।

कोठे ऊपर एक स्त्री, चढ़ी सृंगार बनाने को।
भरी सलाई सुरमे वाली, सुरमा नैन लगाने को।
एक गुलेल लगी पीछे से, सुर्मादानी पड़ी रही।।

सैर करन को एक बाउजी, गाड़ी पर असवार हुए।
गाड़ी चलाने भी न पाई, बाबू ठंडे ठार हुए।
लगा तमाचा कालबली का, सड़क पे टमटम खड़ी रही।।

गौरीशंकर चेतो प्राणी, झगड़े ओर फिसाद तजो।
जाने दो सारी बातों को, कृष्ण राधे श्याम भजो।
बड़े-२ मिल गए खाक में, सदा नहीं फुलझड़ी रही।।

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