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कर्म गति टारी नाहीं टरी-Kabir Ke Shabd-karm gati taari naahin tari।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
कर्म गति टारी नाहीं टरी।
मुनि वशिष्ट से ज्ञानी पंडित, शोध के लग्न धरि।
सीता हरण मरण दशरथ को, बन में विपत पड़ी।।

नीच हाथ हरिश्चंद्र बिकाने, बलि पाताल धरी।
कोटि गाय नित पुण्य करत, नृग गिरगिट जोनि पड़ी।।

पांडव जिन के आप सारथी, तिन पर विपत पड़ी।
दुर्योधन को गर्व घटायो, यदुकुल नाश करी।।

राहु केतु भानु चन्द्रमा, विधि संयोग पड़ी।
कह कबीर सुनो भई साधो,होनी होके रही।।

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