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कठिन चोट वैराग की,जानै कोए विरला ए साध हे हेली-Kabir Ke Shabd-kathin chot vairaag ki,jaanai koa virlaa aye saadh he heli।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 
कबीर के शब्द
कठिन चोट वैराग की,जानै कोए विरला ए साध हे हेली।
कौन बून्द धरती रची रे कौन बुंद आसमान।
कौन बून्द साधु रचे हे हेली, कौन बून्द संसार।।

शब्द बून्द धरणी रची री,सर्प बून्द आकाश।
शब्द बून्द साधु रचे हेली, के बून्द आकाश।।

रैन समाई भान में हेली री, भान समाया आकाश।
आकाश समाया सुन्न में हेली री, सुन्न काहे में समाय।।

बिन देखे उस देश की हेली री,बात करै सब कोए।
आपै खारे खात हैं हेली री, चेतन चेत कपूर।।

हम हंसा उस देश के हेली री, छन आवे छन जाए।
कह कबीरा धर्मिदास से हेली री, आवागमन निसाए।।

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