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कोए बदलेंगें हरी जन सुर मनवा तेरी आदत ने-Kabir Ke Shabd-koa badlengen hari jan sur manvaa teri aadat ne।

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SANT KABIR (Inspirational Biographies for Children) (Hindi Edition ...
Kabir Ke Shabd 

कबीर के शब्द
कोए बदलेंगें हरी जन सुर मनवा तेरी आदत ने।
चोर ज्वारी क्या बदलेंगें,माया के मजदूर।
भांग तमाखू अम्ल धतूरा,रहे नशे में चूर।।

पांच विषयों में लटपट हो थे,सदा     मति के क्रूर।
उन ने तो सुख सपने ही नाहीं,रहे साहिब से दूर।।

पाँचों ठगनी मिल के लूटें,माहि तृष्णा हूर।
बे अक़्ली मेँ हम लूटेंगे, मचा रही फस्तुर।।

उत्तम कर्म हरी की भक्ति,सत्संग करो जरूर।
जन्म-२के पाप कटेंगें,हो जांगे माफ़ कसूर।।

सुरति स्मृति वेद की नीति,गुरु मिले भरपूर।
सन्त जोतराम समझ का मेला,सच्चिदानंद नूर।।

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